हमारी संस्कृति
"हनुमान जी ने सुनी अंजलि की पुकार"
"हनुमान जी ने सुनी अंजलि की पुकार"
ऋषिनगर में केशवदत्त ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहता था। केशवदत्त के घर में धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। ....
"शिव की महिमा अपरम्पार"
एक समय की बात है, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी इस कारण वह बहुत दुखी था। पुत्र प्राप....
भगवान श्रीकृष्ण एक थे या अनेक ?

ईसवीं सदी के प्रारंभ से अथवा उससे भी सैकड़ों वर्ष पहले से हमारे देश के अनेक प्रतिभाशाली एवं अनुभवी महर्षियों ने भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का व....

श्रीश्रीराधातत्त्व

श्रीराधा के संबंध में आलोचना करते समय सबसे पहले वैष्णवों के राधातत्त्व के अनुसार ही आलोचना करनी पड़ती है । वायुपुराण आदि में राधा की जैसी आलोच....

वेदमालिको भगवत्प्राप्ति

प्राचीन काल की बात है । रैवत - मंवतर में वेदमालि नाम से प्रसिद्ध एक ब्राह्मण रहते थे, जो वेदों और वेदांगों के पारदर्शी विद्वान थे । उनके मन मे....

चक्रिक भील

ब्राह्मण, श्रत्रिय, वैश्य, शूद्र और जो अन्य अन्त्यज लोग हैं, वे भी हरिभक्तिद्वारा भगवान की शपृरण होने से कृतार्थ हो जाते हैं, इसमें संशय नहीं ....

मैं तो कृष्ण हो गया !

भगवान ! मेरा उद्धार करो ! मेरी नौका पार लगाओ । मेरे पापों के बोझ से बस, यह डूबना ही चाहती है । बड़ी जीर्ण है यह, और फिर ऊपर से बोझ बेतौल है । ....

पाण्डव अर्जुन और कृष्ण मैत्री

महाभारत में पाण्डव विजयी हुए । छावनी के पास पहुंचने पर श्रीकृष्णने अर्जुन से कहा कि ‘हे भरतश्रेष्ठ ! तू अपने गाण्डीव धनुष और दोनों अक्षय भाथों....

मोक्ष संन्यासिनी गोपियां

कुछ लोग प्रतिदिन सकामोपासना कर मनवाञ्छित फल चाहते हैं, दूसरे कुछ लोग यज्ञादि के द्वारा स्वर्ग की तथा (कर्म और ज्ञान) योग आदि के द्वारा मुक्ति ....

रक्षक प्रभु

इन्द्र से वरदान में प्राप्त एक अमोघ शक्ति कर्ण के पास थी । इन्द्र का कहा हुआ था कि इस शक्ति को तू प्राणसंकट में पड़कर एक बार जिस पर भी छोड़ेगा....

प्रेममय श्रीकृष्ण

श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम का जीवन है, श्रीकृष्ण का संगीत प्रेम का संगीत है, श्रीकृष्ण की शिक्षाएं प्रेमतत्त्वों से परिपूर्ण हैं । गोपाल - कृष्ण ....

भक्त का अद्भुत अवदान

कीच से जैसे कमल उत्पन्न होता है, वैसे ही असुर जाति में भी कुछ भक्त उत्पन्न हो जाते हैं । भक्तराज प्रह्लाद का नाम प्रसिद्ध है । गयासुर भी इसी क....

कर्तव्यपरायणता का अद्भुत आदर्श
प्राचीन काल में सर्वसमृद्धिपूर्ण वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक धर्मात्मा राजा था। एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक गुणी व....
मुक्ति के लिये साधन की आवश्यकता

भगवान सर्वज्ञ हैं, सब कुछ जानते हैं, परंतु किसकी मुक्ति होगी इसको भगवान भी पहले से नहीं जानते हैं, यदि पहले से ही जान जाएं तो प्रयत्न की क्या ....

आदिगुरु श्रीकृष्ण

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकीपरमानंद कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।।

यह संसार एक बहुत बड़ी पाठशाला है । इसमें अगणि....

भगवान की न्यायकारिता एवं दयालुता

भगवान दयालु हैं या न्यायकारी हैं । हम तो यह मानते हैं कि वे दयालु भी हैं, न्यायकारी भी हैं । दो बात एक जगह कैसे रह सकती है ? मनुष्य में भी रह ....

सुदामा की कथा

सुदामा एक अत्यंत दीन ब्राह्मण थे । बालकपन में उसी गुरु के पास विद्याध्ययन करने गये थे जहां भगवान श्रीकृष्ण चंद्र अपने जेठे भाई बलराम जी के साथ....

आध्यात्मिक रहस्य

यह सुदामा कौन हैं ? उनकी पत्नी कौन हैं ? वे तन्दुल कौन से हैं ? इत्यादि । यदि अंत:प्रविष्ट होकर देखा जाएं तो सुदामा की कथा में एक आध्यात्मिक र....

आध्यात्मिक रहस्य

यह सुदामा कौन हैं ? उनकी पत्नी कौन हैं ? वे तन्दुल कौन से हैं ? इत्यादि । यदि अंत:प्रविष्ट होकर देखा जाएं तो सुदामा की कथा में एक आध्यात्मिक र....

परमात्मा की शरण में है स्वर्ग
परमात्मा में मन लगाना मन को वश में करने का प्रधान उपाय है।

अभ्यास और वैराग्य से मन वश में हो सकता है। वैराग्य का तात्पर्य है सारे संसार के तृष्....
भक्ति की अद्भुत पराकाष्ठा की मिसाल भगवान हनुमान
लंका मे रावण को परास्त करने के बाद श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ अयोध्या लौट चुके थे। प्रभु राम के आने की खुशी में पूरे अयोध्या मे....
विलक्षण गुरुदक्षिणा
आचार्य द्रोण का अपमान उनके सहपाठी पांचाल नरेश द्रुपद ने यह कह कर दिया कि एक राजा की तुम्हारे जैसे श्रीहीन और निर्धन मनुष्य के साथ कैसी मित्रता? इस तरह....
सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में
ओंकारेश्वर मंदिर

भगवान शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस स्था....
योगेश्वर श्रीकृष्ण
रासलीला तथा अन्यान्य प्रकरणों में श्रीकृष्ण नाम के साथ महर्षि वेदव्यास के द्वारा ‘योगेश्वर’ शब्द का प्रयोग होते हुए देखकर साधारण पाठकों के हृदय में सन....
श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु और श्रीकृष्ण भक्ति
सर्वसम्पद पूर्ण - आनंद दायक आकर्षणसत्तायुक्त चिद्घनस्वरूप परमतत्त्व की ओर आकृष्ट चित्कणस्वरूप जीवसमुदाय की जो आकर्षम क्रिया है, उसी का नाम भक्ति है । ....
राधा - भाव
राधा भाव में उपासक और उपास्य में प्रेमाधिक्य के कारण एकरूपता हो जाती है । यही कारण था कि भगवान श्रीकृष्ण राधा जी हो जाते थे और श्रीराधा श्रीकृष्ण बन ....
भक्तों की तीन श्रेणियां
भक्तों की तीन श्रेणियां होती हैं । एक तो वे होते हैं जो किसी फल की कामना से भगवान को भजते हैं । भगवान कहते हैं - उनकी भक्ति वास्तविक भक्ति नहीं, वह तो....
मन ही बंधन और मुक्ति का कारण

सुशील नाम के एक ब्राह्मण थे । उनके दो पुत्र थे । बड़े का नाम था सुवृत्त और छोटे का वृत्त । दोनों युवा थे । दोनों गुणसंपन्न तथा कई विद्याओं में....

वेदांतमत और वैष्णवमत

सगुण ब्रह्म ईश्वर हैं, वे सर्वशक्तिमान हैं, आत्मा में जो एक अप्रतिहत शक्ति सहज ही रहती है, वह ईश्वर की कला है । वहीं अप्रतिहत शक्ति जब एक से अ....

श्री शबरी जी की भक्ति

सबको परमगति प्रदान करते हुए उदारशिरोमणि भगवान शबरी को भी गति देने के लिए उसके आश्रम में पधारे । ‘आश्रम’ शब्द से शबरी जी का विरक्त होना सूचित क....

लोकसंग्रह और भगवान श्रीकृष्ण

लोकसंग्रह की पद्धति ठीक तरह से समझ में आ जाएं, इसके लिए एक नियम है, और वह यह है कि जिस प्रकार अज्ञानी पुरुष मन में धन और कीर्ति की अभिलाषा रखक....

आज का भजन
आज का पंचांग
आज का दर्शन
© 2019 Sanskar Info Pvt. Ltd.
All rights reserved | Legal Policy
कार्यक्रम विवरण | हमारे बारे में | संपर्क