हमारी संस्कृति
राजा खनित्र का सद्भाव

पूर्वकाल में प्रांशु नामक एक चक्रवती सम्राट थे । इनके ज्येष्ठ पुत्र का नाम प्रजाति था । प्रजाति के अनित्र, शौरि, उदावसु, सुनय, महारथ नामक पांच....

"देवी का पांचवा स्वरूप - स्कंदमाता"

नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरुप भगवान स्कन्द की माता अर्थात "मां स्कंदमाता" की उपासना की जाती है । कुमार कार्तिकेय को ही "भगवान स....

भगवान भास्कर की आराधना का अद्भुत फल

महाराज सत्राजित का भगवान भास्कर में स्वाभाविक अनुराग था । उनके नेत्र कमल तो केवल दिन में भगवान सूर्य पर टकटकी लगाये रहते हैं, किंतु सत्राजित क....

आदर्श भक्त

उशीनर - पुत्र हरिभक्त महाराज शिबि बड़े ही दयालु और शरणागतवत्सल थे । एक समय राजा एक महान यज्ञ कर रहे थे । इतने में भय से कांपता हुआ एक कबूतर रा....

राजा राज्यवर्धन पर भगवान सूर्य की कृपा

पूर्वकाल में दम नामक एक राजा थे, उनके पुत्र का नाम राज्यवर्धन था । वे भलीभांति पृथ्वी का पालन करते थे । उनके राष्ट्र में धन - जन प्रतिदिन बढ़ ....

राजा रंतिदेव

भारतवर्ष नररत्नों का भंडार है । किसी भी विषय में लीजिए, इस देश के इतिहास में उच्च - से - उच्च उदाहरण मिल सकते हैं । संकृति नामक राजा के दो पुत....

कर्तव्यपरायणता का अद्भुत आदर्श

प्राचीन काल में सर्वसमृद्धिपूर्ण वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक धर्मात्मा राजा था । एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक गुणी व्यक्ति अपनी ....

विपुलस्वान मुनि और उनके पुत्रों की कथा

द्वापर युग की बात है मंदनपाल नाम का एक पक्षी था । उसके चार पुत्र थे, जो बड़े बुद्धिमान थे । उनमें द्रोण सबसे छोटा था । वह बड़ा धर्मात्मा और वे....

राजा विदूरथ की कथा

विख्यातकीर्ति राजा विदूरथ के सुनीति और सुमति नामक दो पुत्र थे । एक समय विदूरथ शिकार के लिए वन में गये, वहां ऊपर निकले हुए पृथ्वी के मुख के समा....

इंद्र का गर्व - भंग

शचीपति देवराज इंद्र कोई साधारण व्यक्ति नहीं, एक मन्वंतरपर्यन्त रहनेवाले स्वर्ग के अधिपति हैं । घड़ी - घंटों के लिए जो किसी देश का प्रधान मंत्र....

आंख खोलने वाली गाथा

राजा नहुष की छ: संतानों में से महाराज ययाति दूसरी संतान थे । इनके बड़े भाई का नाम यति था । वे बचपन से निवृत्तिमार्ग में अग्रसर होकर ‘ब्रह्म’ स्....

चैतन्य महाप्रभु, वाल्मीकि और शंकराचार्य के आविर्भाव की कथा

देवगुरु बृहस्पति ने कहा - देवेंद्र ! प्राचीन काल में किसी समय वेदपारंगत विष्णुशर्मा नाम के एक ब्राह्मण थे । वे प्रसन्नचित्त से सर्वदेवमय विष्ण....

शिवोपासना का अद्भुत फल

प्राचीन काल में एक राजा थे, जिनका नाम था इंद्रद्युम्न । वे बड़े दानी, धर्मज्ञ और सामर्थ्यशाली थे । धनार्थियों को वे सहस्त्र स्वर्णमुद्राओं से ....

मूर्ति पूजन का तात्पर्य

स्वामी विवेकानंद की ख्याति दिन प्रतिदिन फैलती रही । उनका गुणगान सुनकर अलवर राज्य के दीवान महोदय ने उन्हें अपने घर बुलाया । स्वामी जी का सत्संग....

राजा भोज और महामद की कथा

सूतजी ने कहा - ऋषियों ! शालिवाहन के वंश में दस राजा हुए । उन्होंने पांच सौ वर्ष तक शासन किया और स्वर्गवासी हुए । तदनंतर भूमण्डल पर धर्म मर्याद....

कीड़े से महर्षि मैत्रेय

भगवान व्यास सभी जीवों की गति तथा भाषा को समझते थे । एक बार जब वे कहीं जा रहे थे तब रास्ते में उन्होंने एक कीड़े को बड़े वेग से भागते हुए देखा ....

देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव

सूत जी ने कहा - भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, पर वे सभी अल्पायु, मंद बुद्धि और अल्पतेजस्वी हुए तथा तीन सौ वर्ष क....

महर्षि सौभरि की जीवन गाथा

वासना का राज्य अखण्ड है । वासना का विराम नहीं । फल मिलने पर यदि एक वासना को हम समाप्त करने में समर्थ भी होते हैं तो न जाने कहां से दूसरी और उस....

देवी षष्ठी की कथा
देवी षष्ठी की कथा

प्रियव्रत नाम से प्रसिद्ध एक राजा हो चुके हैं । उनके पिता का नाम था स्वायम्भुव मनु । प्रियव्रत योगिराज होने के कारण विवाह कर....

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि ?

इस व्रत की दो कथाएं है । एक का सारांश यह है कि एक बार एक धनवान मनुष्य कुसंगवश शिवरात्रि के दिन पूजन करती हुई किसी स्त्री का आभूषण चुरा लेने के....

भक्त का अद्भुत अवदान

कीच से जैसे कमल उत्पन्न होता है, वैसे ही असुर जाति में भी कुछ भक्त उत्पन्न हो जाते हैं । भक्तराज प्रह्लाद का नाम प्रसिद्ध है । गयासुर भी इसी क....

कर्तव्यपरायणता का अद्भुत आदर्श
प्राचीन काल में सर्वसमृद्धिपूर्ण वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक धर्मात्मा राजा था। एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक गुणी व....
चक्रिक भील

अर्थात् ‘ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और जो अन्य अन्त्यज लोग हैं, वे भी हरिभक्तिद्वारा भगवान की शरण होने से कृतार्थ हो जाते हैं, इसमें संश....

नवरात्र व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक सुरथ नाम का राजा हुआ करता था । उसके राज्य पर एक बार शत्रुओं ने चढ़ाई कर दी । मंत्री गण भी राजा के साथ विश्वासघात करके शत्रु....

नवरात्र व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक सुरथ नाम का राजा हुआ करता था । उसके राज्य पर एक बार शत्रुओं ने चढ़ाई कर दी । मंत्री गण भी राजा के साथ विश्वासघात करके शत्रु....

सौरधर्म का वर्णन

राजा शतानीक ने पूछा - मुने ! भगवान सूर्य का माहात्म्य कीर्तिवर्धक और सभी पापों का नाशक है । मैंने भगवान सूर्यनारायण के समान लोक में किसी ....

सौरधर्म का वर्णन

राजा शतानीक ने पूछा - मुने ! भगवान सूर्य का माहात्म्य कीर्तिवर्धक और सभी पापों का नाशक है । मैंने भगवान सूर्यनारायण के समान लोक में किसी ....

श्रीदुर्गासप्तशती के आदिचरित्र का माहात्म्य

ऋषियों ने पूछा - सूतजी महाराज ! अब आप हमलोगों को यह बतलाने की कृपा करें कि किस स्तोत्र के पाठ करने से वेदों के पाठ करने का फल प्राप्त होत....

सुदामा की कथा

सुदामा एक अत्यंत दीन ब्राह्मण थे । बालकपन में उसी गुरु के पास विद्याध्ययन करने गये थे जहां भगवान श्रीकृष्ण चंद्र अपने जेठे भाई बलराम जी के साथ....

परम शैव भगवान विष्णु की शिवोपासना
समय के परिवर्तन से कभी तो देवता बलवान हो जाते हैं और कभी दानव। एक बार दानवों की शक्ति बहुत अधिक हो गयी और वे देवों को बहुत अधिक कष्ट पहुंचाने लगे। देव....
कैसे वृंदा ने लिया तुलसी का रूप

पौराणिक कथा के अनुसार एक बड़ी ही सुशील कन्या थी। नाम था वृंदा। उसका जन्म राक्षस कुल में हुआ था लेकिन वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु जी की परम भक....

गणेश संकष्ट चतुर्थी व्रत‬
सभी महीनों की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गणेश संकष्ट चतुर्थी कहलाती है। इसे वक्रतुंडी चतुर्थी, माही चौथ, तिल अथवा तिलकूट चतुर्थी व्रत भी कहते हैं। मंगलमूर्....
मां के 51 शक्तिपीठों की एक पौराणिक कथा

अद्भुत अतिथि सत्कार
एक दिन एक व्याध भयानक वन में शिकार करते समय पत्थर - पानी - हवा की चोट से अत्यंत दुर्गति में पड़ गया । कुछ दूर आगे बढ़ने पर उसे एक वृक्ष दिखा । उसकी छ....
सत्कर्म में श्रमदान का अद्भुत फल
बृहत् कल्प की बात है । उस समय धर्ममूर्ति नामक एक प्रभावशाली राजा थे । उनमें कुछ अलौकिक शक्तियां थीं । वे इच्छा के अनुसार रूप बदल सकते थे । उनकी देह से....
गुणनिधि पर भगवान शिव की कृपा
पूर्वकाल में यज्ञदत्त नामक एक ब्राह्मण थे । समस्त वेद शास्त्रादि का ज्ञाता होने से उन्होंने अतुल धन एवं कीर्ति अर्जित की थी । उनकी पत्नी सर्वगुणसं....
कुवलाश्व के द्वारा जगत की रक्षा

पूर्वकाल में धुंधु नाम का एक राक्षस हुआ था । वह ब्रह्मा से वरदान पाकर देवताओं, दानवों, दैत्यों, नागों, गंधर्वों और राक्षसों के द्वारा अवध्य हो....

भगवन्नाम समस्त पापों को भस्म कर देता है (यमदूतों का नया अनुभव)

कन्नौज के आचारच्युत एवं जातिच्युत ब्राह्मण अजामिल ने कुलटा दासी को पत्नी बना लिया था । न्याय - अन्याय से जैसे भी धन मिले, वैसे प्राप्त करना और....

मुनिवर गौतमद्वारा कृतघ्न ब्राह्मणों को शाप

एक बार इंद्र ने लगातार पंद्रह वर्षों तक पृथ्वी पर वर्षा नहीं की । इस अनावृष्टि के कारण घोर दुर्भिक्ष पड़ गया । सभी मानव क्षुब्धा तृषा से पीड़ि....

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