हमारी संस्कृति
जानिए कर्ण को क्यों मिला श्राप
कर्ण की शिक्षा अपने अन्तिम चरण पर थी। एक दोपहर की बात है, गुरू परशुराम कर्ण की जंघा पर सिर रखकर विश्राम कर रहे थे। कुछ देर बाद कहीं से एक बिच्छू आया औ....
यज्ञ कर्म
एवं बहुविधा यज्ञा विवतो ब्रह्मणो मुखे।
कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ।। 4/31


अर्थात:....
अर्जुन के रथ पर क्यों बैठे थे हनुमान?
महाभारत के अनुसार, जब कौरव सेना का नाश हो गया तो दुर्योधन भाग कर एक तालाब में छिप गया। पांडवों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने दुर्योधन को युद्ध क....
"कर्ण को कैसे प्राप्त हुआ विजय धनुष"

कर्ण अपनी इस विजय धारी धनुष के कारण पूरी दुनिया में अजय माना जाता था। क्योंकि, कर्ण के इसी विजय धारी धनुष के कारण ही एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्ज....

"क्या है गीता जयंती का महत्व"

ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था....

भक्त अर्जुन और श्रीकृष्ण

एक बार कैलाश के शिखर पर श्री श्री गौरीशंकर भगवद्भक्तों के विषय में कुछ वार्तालाप कर रहे थे । उसी प्रसंग में जगज्जननी श्री पार्वती जी ने आशुतोष....

सारथ्य

भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत - संग्राम में और किसी का सारथ्य न करके अर्जुन ही सारथ्यकार्य क्यों किया, यह भी एक विचारणीय विषय है । जब भगवान अपनी ....

पाण्डव अर्जुन और कृष्ण मैत्री

महाभारत में पाण्डव विजयी हुए । छावनी के पास पहुंचने पर श्रीकृष्णने अर्जुन से कहा कि ‘हे भरतश्रेष्ठ ! तू अपने गाण्डीव धनुष और दोनों अक्षय भाथों....

रक्षक प्रभु

इन्द्र से वरदान में प्राप्त एक अमोघ शक्ति कर्ण के पास थी । इन्द्र का कहा हुआ था कि इस शक्ति को तू प्राणसंकट में पड़कर एक बार जिस पर भी छोड़ेगा....

जन्म - कर्म
भगवान के जन्म - कर्म की दिव्यता एक अलौकिक और रहस्यमय विषय है, इसके तत्त्व को वास्तव में तो भगवान ही जानते है अथवा यत्किंचित उनके वे भक्त जानते हैं, जि....
विलक्षण गुरुदक्षिणा
आचार्य द्रोण का अपमान उनके सहपाठी पांचाल नरेश द्रुपद ने यह कह कर दिया कि एक राजा की तुम्हारे जैसे श्रीहीन और निर्धन मनुष्य के साथ कैसी मित्रता? इस तरह....
शिव जी का किरात वेष में प्रकट होना
इंद्र के उपदेश तथा व्यास जी की आज्ञा से अर्जुन भगवान महेश्वर की आराधना करने लगे । उनकी उपासना से ऐसा उत्कृष्ट तेज प्रकट हुआ, जिससे देवगण विस्मिल हो ग....
भजन
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