हमारी संस्कृति
अर्धनारीश्वर शिव

सृष्टि के आदि में जब सृष्टिकर्ता ब्रह्माद्वारा रची हुई सृष्टि विस्तार को नहीं प्राप्त हुई, तब ब्रह्मा जी उस दु:ख से अत्यंत दु:खी हुए । उसी समय....

श्री राम के साथ करें, भगवान शिव की उपासना
ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव श्री राम के इष्ट एवं श्री राम शिव के इष्ट हैं। ऐसा संयोग इतिहास में नहीं मिलता कि उपास्य और उपासक में परस्पर इष्ट भाव हो....
परब्रह्म शिव ही परमात्मा हैं
परब्रह्म शिव ही परमात्मा हैं। वह संपूर्ण सृष्टि के आदि कारण हैं, इसीलिए उन्हें आदिनाथ भी कहा जाता है। वह संपूर्ण ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं। ह....
शिव को क्यों प्रिय है भांग
भगवान शिव की पूजा सबसे आसान मानी जाती है क्योंकि भोलेबाबा को खुश करने के लिए खोआ, मिठाई की जरूरत नहीं होती इन्हें मुफ्त में मिलने वाले बेलपत्र, धतूरा ....
कैसे हुई थी रुद्राक्ष की उत्पत्ति ?
रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से मानी जाती है। इस बारे में पुराण में एक कथा प्रचलित है। कहते हैं एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर दुनिया....
"नंदी के अबोध आचरण ने किया भोलेनाथ को क्रोधित"
पौराणिक दंत कथा अनुसार, एक बार शिवजी के निवास स्थान पर कुछ दुष्ट व्यक्ति प्रवेश कर जाते हैं। इस बात का बोध होते ही शिवजी नंदी को कुछ निर्देश देने के ल....
"भगवान शिव के चार साथी"
"भगवान शिव के चार साथी"
भगवान श‌िव का ध्यान करने मात्र से मन में जो एक छव‌ि उभरती है वो एक वैरागी पुरुष की है। इनके एक हाथ में त्र‌िशूल, दूसरे हाथ....
आज है हरियाली तीज, 108वें जन्म मे पूरी हुई थी पार्वती माता की तपस्या
इस तीज व्रत में मां पार्वती के अवतार तीज माता की उपासना की जाती है। पौराणिक जानकारी के अनुसार मां पार्वती ही श्रावण महीने की तृतीया तिथि को देवी के रू....
"भगवान विष्णु ने किया माता पार्वती से छल"
मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम कभी भगवान शिव और पार्वती का विश्राम स्थान हुआ करता था। यहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते थे लेकिन श्रीहरि विष्णु ....
"कैसे शेर बना मां दुर्गा की सवारी
मां दुर्गा को यूं ही शेर की सवारी प्राप्त नहीं हुई थी इसके पीछे एक रोचक कहानी है। धार्मिक इतिहास के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए द....
"कैसे पड़ा भगवान शिव का नाम त्रिपुरारी?"
 शिवपुराण के अनुसार,  दैत्य तारकासुर के तीन पुत्र थे- तारकाक्ष,  कमलाक्ष व विद्युन्माली। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का....
"शिव की महिमा अपरम्पार"
एक समय की बात है, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी इस कारण वह बहुत दुखी था। पुत्र प्राप....
"भगवान शिव ने कैसे किया कृष्ण के बालरुप का दर्शन ?"
भगवान शिव के इष्ट हैं विष्णु। जब विष्णुजी ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया तो अपने इष्ट के बाल रूप के दर्शन और उनकी लीला को देखने के लिए शिवजी ने जो....
"मुश्किल कार्य को करें आसान गणपति"
एक बार भगवान शिव के मन में एक बड़े यज्ञ के अनुष्ठान का विचार आया। विचार आते ही वे शीघ्र यज्ञ प्रारंभ करने की तैयारियों में जुट गए। सारे गणों को यज्ञ अ....
"भगवान विष्णु ने क्यों लिया मोहिनी अवतार"

श्रीहरि यानी भगवान विष्णु ने एकमात्र स्त्री रूप लिया है, और वो है मोहिनी अवतार। यह अवतार उन्होंने कई बार लिया। लेकिन धर्मग्रंथों से मिली प्रमाणिक ज....

"कैसे हुई गंगा मां की उत्पत्ति?"


गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए अंशुमान के पुत्र दिलीप व दिलीप के पुत्र भागीरथ ने बड़ी तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर म....

"क्यों पूजा जाता है सर्वप्रथम भगवान गणेश को"

पद्मपुराण में बताया गया जब यह प्रश्न उठा कि प्रथमपूज्य किसे माना जाए, तो समस्त देवतागण ब्रह्माजी के पास पहुंचे। ब्रह्माजी ने कहा - कि जो कोई संपूर्....

"महादेव के अर्द्धनारीश्वर अवतार की कथा"

“शीश गंग अर्धंग पार्वती….. नंदी भृंगी नृत्य करत है”  शिव स्तुति में आये इस भृंगी नाम को आप सब ने जरुर ही सुना होगा। पौराणिक....

“चंद्रदेव के तप से कैसे बना सोमनाथ ज्योतिर्लिंग”

जब प्रजापति दक्ष ने अपनी सभी सत्ताइस पुत्रियों का विवाह चन्द्रमा के साथ कर दिया, तो वे बहुत प्रसन्न हुए। पत्नी के रूप में दक्ष कन्याओं को प्राप्त क....

"क्यों काटा भैरव ने बह्मा का सर"

एक बार देवताओं ने ब्रह्मा और विष्णु जी से बारी-बारी से पूछा कि जगत में सबसे श्रेष्ठ कौन है तो स्वाभाविक ही उन्होंने अपने को श्रेष्ठ बताया। देवताओं ....

"देवी भगवती का रुप देख कर, क्यों महादेव घबरा गए"

देवी पुराण के अनुसार जब सती के पिता दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें अपनी पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को निमंत्रित नहीं किया। यज्ञ के....

नंदी ने क्यों की भगवान शिव की आराधना

पुराणों में यह कथा मिलती है कि शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। शिलाद निरंतर ....

“भारत के वो रहस्यमयी मंदिर, जहां बढ़ रहा शिवलिंग का आकार”

महादेव के दुनियाभर में सैकड़ों मंदिर हैं। हर दिन भक्तजन शंकर के दर पर पहुंच शिव के प्रतिक शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि शिवलिं....

"सुध महादेव मंदिर का रहस्य"

जम्मू से 120 किलो मीटर दूर तथा समुद्र तल से 1225 मीटर की ऊंचाई पर, पटनीटॉप के पास सुध महादेव (शुद्ध महादेव) का मंदिर स्तिथ है। यह मंदिर शिवजी के प्....

"कैसे बने हनुमान बलशाली"

शिवमहापुराण के अनुसार देवताओं और दानवों को अमृत बांटते हुए विष्णुजी के मोहिनी रूप को देखकर लीलावश शिवजी ने कामातुर होकर अपना वीर्यपात कर दिया। सप्त....

"तीर्थस्थान अमरनाथ के कबूतरों का क्या है रहस्य"

पौराणिक मान्याताओं के अनुसार, अमरनाथ की गुफा ही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने पार्वती को अमर होने के गुप्त रहस्य बतलाए थें, उस दौरान उन ‘दो ज....

"क्यों किया भगवान विष्णु ने वृंदा के साथ छल"

श्रीमद्मदेवी भागवत पुराण अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपना तेज समुद्र में फेंक दिया तथा इससे जलंधर उत्पन्न हुआ। माना जाता है कि जलंधर में अपार शक्ति ....

महाशिवरात्रि की पूजा का क्या है महत्त्व

शिवपुराण की कोटिरुद्रसंहिता में बताया गया है कि शिवरात्रि व्रत करने से व्यक्ति को भोग एवं मोक्ष दोनों ही प्राप्त होते हैं। ब्रह्मा, विष्णु तथा पार्....

"शेर क्यों है माता रानी की सवारी"

मां दुर्गा तेज, शक्ति और सामर्थ्‍य की प्रतीक हैं और उनकी सवारी शेर है। शेर प्रतीक है आक्रामकता और शौर्य का। यह तीनों विशेषताएं मां दुर्गा के आच....

"भगवान शिव और असावरी देवी का क्या था रिश्ता?"

भगवान शिव की पत्नी और बच्चों के बारे में सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको ये पता है कि शिवजी की एक बहन भी थी। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती....

"कैसे हुई भगवान गणेश की शादी"

जब भी गणेश  किसी अन्य देवता के विवाह में जाते थे तो उनके मन को बहुत ठेस पहुँचती थी। उन्हें ऐसा लगा कि अगर उनका विवाह नहीं हो पा रहा तो वे किसी....

"महादेव के अद्भुत अवतार"

वीरभद्र अवतार - भगवान शिव का यह अवतार तब हुआ था, जब दक्ष के यज्ञकुंड में देवी सती ने ....

बुद्धि के देवता गणेश

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और बुद्धि का देवता माना जाता है और बुधवार को उनकी आराधना विशेष लाभकारी मानी जाती है। श्रीगणेश की पूजा सभी देवताओं से पहले....

पंचमुख तथा पंचमूर्ति

‘जिन भगवान शंकर के ऊपर की ओर गजमुक्ता के समान किंचित श्वेत - पीत वर्ण, पूर्व की ओर सुवर्ण के समान पीतवर्ण, दक्षिण की ओर सजल मेघ के समान सघन नी....

आल्हा ऊदल की कथा

ऋषियों ने पूछा - सूतजी महाराज ! आपने महाराज विक्रमादित्य के इतिहास का वर्णन किया । द्वापरयुग के समान उनका शासन धर्म एवं न्यायपूर्ण था और लंबे ....

शिव और सती

सिव सम को रघुपति ब्रतधारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ।।
भगवान शिव और माता सती देवी की असीम महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से प्रतिपादित की है । भ....

शिवोपासना का अद्भुत फल

प्राचीन काल में एक राजा थे, जिनका नाम था इंद्रद्युम्न । वे बड़े दानी, धर्मज्ञ और सामर्थ्यशाली थे । धनार्थियों को वे सहस्त्र स्वर्णमुद्राओं से ....

कैसे करें महाशिवरात्री की पूजा

यह व्रत फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को किया जाता है । इसको प्रतिवर्ष करने से यह ‘नित्य’ और किसी कामनापूर्वक करने से ‘काम्य’ होता है । प्रतिपदादि ति....

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि ?

इस व्रत की दो कथाएं है । एक का सारांश यह है कि एक बार एक धनवान मनुष्य कुसंगवश शिवरात्रि के दिन पूजन करती हुई किसी स्त्री का आभूषण चुरा लेने के....

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा विग्रह - श्री सोमनाथ

इस विश्व में जो कुछ भी दृश्य देखा जाता है तथा जिसका वर्णन एवं स्मरण किया जाता है, वह सब भगवान शिव का ही रूप है । करूणासिंधुअपने आराधकों, भक्तो....

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा विग्रह - 5) श्री केदारेश्वर

केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नाम श्रृंगपर अवस्थित हैं । शिखर के पूर्व अलकनंदा के सुरम्य तट पर बदरीनारायण अवस्थित हैं और पश्चिम में मंदाकि....

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा विग्रह - 6) श्री भीमशंकर

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग मुंबई से पूर्व एवं पूना से उत्तर भीमा नदी के तट पर सह्यादिपर स्थित है । यहीं से भीमा नदी निकलती है । कहा जाता है कि भीमक ....

श्रीशिवपंचाक्षरस्तोत्रम्
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय।।1।।

जिनके कण्ठ में सांपों का हार है,....
भगवान विष्णु का स्वप्न
एक बार भगवान नारायण अपने वैकुंठलोक में सोये हुए थे। स्वप्न में वे क्या देखते हैं कि करोड़ों चंद्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरूधारी, स्वर्णाभरण-भूषित,....
जानिए क्या है मानस-पूजा और कैसे करें भगवान शिव की मानसपूजा
शास्त्रों में पूजा को हजारगुना अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए एक उपाय बतलाया गया है। वह उपाय है मानस-पूजा, जिसे पूजा से पहले करके फिर बाह्य वस्तुओं से प....
भगवती सती का शिव-प्रेम
एक समय की बात थी लीलाधारी परमेश्वर शिव एकान्त में बैठे हुए थे। वहीं सती भी विराजमान थीं। आपस में वार्तालाप के प्रसंग में भगवान् शिव के मुख से सती के श....
शिव और शक्ति
‘शिव’ और ‘शक्ति’- ये परम शिव अर्थात् परम तत्त्व के दो रुप हैं। शिव कूटस्थ तत्त्व है और शक्ति परिणामिनी है। विविध वैचित्र्यपूर्ण संसार के रुप में अभिव्....
परम शैव भगवान विष्णु की शिवोपासना
समय के परिवर्तन से कभी तो देवता बलवान हो जाते हैं और कभी दानव। एक बार दानवों की शक्ति बहुत अधिक हो गयी और वे देवों को बहुत अधिक कष्ट पहुंचाने लगे। देव....
तुलसीदल का महात्म्य
भगवान शिव ने स्वयं कहा है - ‘‘सब प्रकार के पत्तों और पुष्पों की अपेक्षा तुलसी ही श्रेष्ठ मानी गई है। वह परम मंगलमयी, समस्त कामनाओ....
प्रदोष व्रत का महत्त्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों को किया जाता है। प्रद....
गणेश संकष्ट चतुर्थी व्रत‬
सभी महीनों की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गणेश संकष्ट चतुर्थी कहलाती है। इसे वक्रतुंडी चतुर्थी, माही चौथ, तिल अथवा तिलकूट चतुर्थी व्रत भी कहते हैं। मंगलमूर्....
गणेश जी को दूर्वा(दूब) क्यों चढ़ाई जाती है ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-....
जाने, किस भगवान को है कौन सा पुष्प प्रिय...

श्रीगणेश

भगवान शिव के लिए माता पार्वती ने किया था घोर तप
शिवपुराण में कथा है कि ब्रह्माजी के आदेशानुसार भगवान शंकर को वरण करने के लिए पार्वती ने कठोर तप किया था। ब्रह्मा के आदेशोपरांत महर्षि नारद ने पार....
हो रही है सावन की शुरुआत, ऐसे रखें सोमवार का व्रत
आदिकाल से ही सावन माह में सोमवारी व्रत का विशेष महत्त्व है। इस वर्ष सावन की शुरुआत 20 जुलाई से हो रही है। इस माह का प्रथम सोमवारी व्रत सोमवार 25 जुलाई....
सावन में सोमवार का हैं खास महत्त्व
पवित्र सावन माह की शुरुआत हो गई है। शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माने जाने वाले इस माह में सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा का महत्त्व है। आ....
क्यों प्रिय है भगवान शिव को बेलपत्र
शिव पूजा का सबसे पावन दिन है सोमवार। सभी देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव भोले को आ....
रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण
भगवान शिव अनादि व अनन्त हैं अर्थात न तो कोई भगवान शिव के प्रारंभ के बारे में जानता है और न ही कोई अंत के बारे में। इसलिए इन्हें अजन्मा और अनश्वर भी कह....
सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में
कैलाश मानसरोवर
कैलाश पर्वत और मानसरोवर को धरती का केंद्र माना जाता है। यह हिमालय के केंद्र में है। मानसरोवर वह....
सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में
महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। यह मध्य प्रदेश क....
सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में
श्री वैद्यनाथ

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग समस्त ज्योतिर्लिंगों में नौवें स्थान पर है। यह झ....
सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में
ओंकारेश्वर मंदिर

भगवान शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस स्था....
सदाशिव - भगवान शिव के अवतार
जो ब्रह्मा होकर समस्त लोकों की सृष्टि करते हैं, विष्णु होकर सबका पालन करते हैं और अंत में रुद्ररूप से सबका संहार करते हैं, वे सदाशिव मेरी परमगति हों ।....
एक ऐसा तीर्थ जहां स्वयं प्रभु राम ने की थी शिव जी की आराधना
रामेश्वर
ज्योतिर्लिंग में एकादशवें पर है श्री "रामेश्वर"। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थ....
जब भगवान शिव को लेना पड़ा कपाली अवतार...
शैवागम के अनुसार दसवें रुद्र का नाम कपाली है। पद्मपुराण के अनुसार एक बार भगवान कपालीब्रह्मा के यज्ञ में कपाल धारण करके गए, जिसके कारण उन्हें यज्ञ....
भगवान शिव के ग्यारह रुद्र रूप
शास्त्रों के मुताबिक शिव ग्यारह अलग-अलग रुद्र रूपों में दु:खों का नाश करते हैं। यह ग्यारह रूप एकादश रुद्र के नाम से जाने जाते हैं। लगभग सभी पुराण....
भगवान कौन है ?
प्राय: यह प्रश्न किया जाता है - भगवान कौन है ? और यह भगवान कहां रहता है ? गीता में कृष्ण ने कहा है - ‘मन की आंखें खोलकर देख, तू मुझे अपने भीतर ही पाए....
काशी के लोलार्क कुंड में विराजते हैं सूर्य
एक बार भगवान शिव ने सूर्य देव को बुलाकर कहा- सप्ताश्ववाहन ! तुम काशीपुरी को जाओ। वहां का राजा परम धार्मिक है। उसका नाम दिवोदास है। राजा के धर्म विरुद्....
कृष्णदर्शन - भगवान शिव के अवतार
श्राद्धदेव नामक मनु के सबसे छोटे पुत्र का नाम नभग था । भगवान शिव ने उन्हें ज्ञान प्रदान किया था । मनुपुत्र नभग बड़े ही बुद्धिमान थे । जिस समय नभग गुर....
जब कुबेर को खुद पर होने लगा अंहकार
देवराज इंद्र के कोषाध्यक्ष कुबेर अपने को देवकोष का मालिक समझ उसके धन का निजी स्वार्थ में उपयोग करने लगे। एक दिन वे भगवान शिव के पास पहुंचे और कहा....
श्री गणेश से गजानन बनने की कहानी
एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर "बाल गणेश" को पहरा दे....
बिल्व वृक्ष का महत्त्व जानकर हैरान हो जाएंगे आप।
भगवान शिव से जुड़े होने के कारण बेल के पेड़ या बिल्व वृक्ष का भी काफी धार्मिक महत्त्व है। कहा जाता है कि भगवान शिव को बिल्वपत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न ह....
भगवान शिव
शैवागम में रुद्र के सातवें स्वरूप को शिव कहा गया है । शिव शब्द नित्य विज्ञानानंदघन परमात्मा का वाचक है । इसलिए शैवागम भगवान शिव को गायत्री के द्वारा ....
भगवान शिव
शैवागम में रुद्र के सातवें स्वरूप को शिव कहा गया है । शिव शब्द नित्य विज्ञानानंदघन परमात्मा का वाचक है । इसलिए शैवागम भगवान शिव को गायत्री के द्वारा ....
भगवान शिव का अवधूतेश्वरावतार
एक बार देवराज इंद्र देवताओं और बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने के लिए कैलाश परिवत पर गए । उस समय बृहस्पति और इंद्र के आगमन कू बात जानकर भगवान....
क्यों मनाई जाती है शिवरात्रि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विधि विधान के साथ भगवान शिव की अराधना क....
हर - भगवान शिव के अवतार
शैवागम के अनुसार भगवान रुद्र के आठवें स्वरूप का नाम हर है । भगवान हर को सर्वभूषण कहा गया है । इसका अभिप्राय यह है कि मंगल और अमंगल सब कुछ ईश्वर - शरीर....
भगवान शिव का भिक्षुवर्यावतार
विदर्भ देश में एक सत्यरथ नाम से प्रसिद्ध राजा थे । धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करते हुए उनका बहुत सा समय सुखपूर्वक बीत गया । तदंनतर एक दिन शाल्व देश के र....
चिकित्सकों के चिकित्सक भगवान शिव
भगवान रुद्र ने ओषधियों का निर्माण करके जगत का इतना कल्याण किया है कि वेद ने भी भगवान शंकर सम्पूर्ण शरीर को ही भेषज मान लिया है । कहा है कि - या ते ....
मौत की भी मौत
जो ईश्वर का भक्त होता है, उसका स्वामी ईश्वर होता है । उसपर मौत का अधिकार नहीं होता । अनधिकार चेष्टा करने से मौत की भी मौत हो जाती है । गोदावरी के तट प....
भगवान शिव का सुरेश्वरावतार
व्याघ्रपाद मुनि के पुत्र का नाम था उपमन्यु । उन्होंने पूर्वजन्म में ही सिद्धि प्राप्त कर ली थी और वर्तमान जन्म में मुनिकुमार होकर प्रकट हुए थे । ये शै....
कपाली - भगवान शिव के अवतार
शैवागम के अनुसार दसवें रुद्र का नाम कपाली है । पद्मपुराण के अनुसार एक बार भगवान कपालीब्रह्मा के यज्ञ में कपाल धारण करके गए, जिसके कारण उन्हें यज्ञ के ....
शिव जी का किरात वेष में प्रकट होना
इंद्र के उपदेश तथा व्यास जी की आज्ञा से अर्जुन भगवान महेश्वर की आराधना करने लगे । उनकी उपासना से ऐसा उत्कृष्ट तेज प्रकट हुआ, जिससे देवगण विस्मिल हो ग....
भव - भगवान शिव के अवतार
भगवान रुद्र के स्वरूप का नाम भव है । इसी रूप में वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं तथा जगद्गुरु के रूप में वेदांत और योग का उपदेश देकर आत्म कल्याण का ....
शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार
एक समय की बात है, भगवान शिव ने भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दे दिया कि तुम जिसके सिर पर अपना हाथ रख दोगे, वह जल कर भस्म हो जायेगा । भस....
नल दमयंती के पूर्व जन्म का वृतांत
पूर्वकाल में आबू पर्वत के समीप एक आहुक नामक भील रहता था । उसकी पत्नी का नाम आहुजा था । वह बड़ी पतिव्रता तथा धर्मशीला थी । वे दंपत्ति बड़े शिवभक्त एवं ....
गंगावतार - भगवान शिव के अवतार
पूर्वकाल में अयोध्या में सागर नामक एक परम प्रतापी राजा राज्य करते थे । उनके एक रानी से एक तथा दूसरी से साठ हजार पुत्र उत्पन्न हुए । कुछ काल के बाद महा....
गुणनिधि पर भगवान शिव की कृपा
पूर्वकाल में यज्ञदत्त नामक एक ब्राह्मण थे । समस्त वेद शास्त्रादि का ज्ञाता होने से उन्होंने अतुल धन एवं कीर्ति अर्जित की थी । उनकी पत्नी सर्वगुणसं....
औढरदानी भगवान शिव

भगवान शिव और उनका नाम समस्त मंगलों का मूल है । वे कल्याण की जन्मभूमि, परम कल्याणमय तथा शांति के आगार हैं । वेद तथा आगमों में भगवान शिव को विशु....

शिव और सती

सिव सम को रघुपति ब्रतधारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ।।
भगवान शिव और माता सती देवी की असीम महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से प्रतिपादित की है । भ....

भगवान शिव का हरिहरात्मक रूप

एक बार सभी देवता भगवान विष्णु के पास गये और उन्हें नमस्कार करने के बाद संपूर्ण जगत के अशांत होने का कारण पूछा । देवताओं के प्रश्न करने पर भगवा....

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