हमारी संस्कृति
सुंदरकांड का धार्मिक महत्त्व क्यों ?

सुंदर कांड वास्तव में हनुमान जी का कांड है । हनुमान जी का एक नाम सुंदर भी है । सुंदर कांड के लिए कहा गया है -

सुंदरे सुंदरे राम: सुंदरे सुं....

राम अंश

अंसन्ह सहित मनुज अवतारा । लेहउं दिनकर बंस उदारा ।।

ब्रह्मादि देवताओं की पुकार पर आकाशवाणी में ‘अंसन्ह सहित’ अवतार लेने की ब्रह्मगिरा हु....

रामनवमी क्यों मनाई जाती है?
रामनवमी भारत में मनाया जाने वालो एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हिंदुओं का भी एक बड़ा और प्रमुख त्योेहार माना जाता है। रामनवमी का त्योहार हर वर्ष मार्च से....
श्री राम के साथ करें, भगवान शिव की उपासना
ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव श्री राम के इष्ट एवं श्री राम शिव के इष्ट हैं। ऐसा संयोग इतिहास में नहीं मिलता कि उपास्य और उपासक में परस्पर इष्ट भाव हो....
जानिए कर्ण को क्यों मिला श्राप
कर्ण की शिक्षा अपने अन्तिम चरण पर थी। एक दोपहर की बात है, गुरू परशुराम कर्ण की जंघा पर सिर रखकर विश्राम कर रहे थे। कुछ देर बाद कहीं से एक बिच्छू आया औ....
आप भी कर लें संकटमोचन को प्रसन्न
आज हनुमान जयंती है. बजरंग बली धीर-वीर परम रामभक्त हनुमान जी के भक्तों के लिए भगवान हनुमान का जन्मदिन यानी उनकी जयंती विशेष महत्त्व रखती है. इस बार हनु....
कुरुचिपूर्ण स्वभाव से बचें
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि जिसका जन्म हुआ है उसका मरण अवश्य होगा। इसी तरह से जिसका मरण होता है उसका जन्म भी अवश्य होता है।
इसके साथ ....
"भगवान विष्णु ने किया माता पार्वती से छल"
मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम कभी भगवान शिव और पार्वती का विश्राम स्थान हुआ करता था। यहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते थे लेकिन श्रीहरि विष्णु ....
"रामकृष्ण परमहंस के आत्म-ज्ञान की कथा
16 अगस्त रामकृष्ण परमहंस की महासमाधि के दिन के रूप में मनाया जाता है। आज हम उनसे जुड़ी एक कथा के बारे में आपको बता रहे हैं।
रामकृष्ण परमहंस ने अपन....
"क्यों कहलातें है पंचरुपी हनुमान"

जब राम और रावण की सेना के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था और रावण अपने पराजय के समीप था तब इस समस्या से उबरने के लिए उसने अपने मायावी भाई अहिरावण को याद....

“जब पहली बार मिले हनुमान और भगवान राम”

एक बार हनुमान जी ऋष्यमूक पर्वत की एक बहुत ऊंची चोटी पर बैठे हुए थे। उसी समय भगवान श्रीराम चंद्र जी सीता जी की खोज करते हुए लक्ष्मण जी के साथ ऋष्यमू....

“मां रेणुका और परशुराम का अद्धभूत मिलन”

प्राचीन काल में आर्यवर्त में हैहय वंशी क्षत्रीय राज करते थे। भृगुवंशी ब्राह्मण उनके राज पुरोहित थे। इसी भृगुवंश के महर्षि ऋचिक के घर महर्षि जमदग्नि....

"तुलसी विवाह कैसे करें, व्रत कथा और पूजा विधि"

कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी यानी की देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी विवाह संपन्न किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम के साथ ....

"क्यों लेना पड़ा मां दुर्गा को भ्रामरी देवी का अवतार"

अरुण नामक दैत्य ने कठोर नियमों का पालन कर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और अरुण से वर मांगने को कहा। अरुण ....

"कैसे बना था श्रीराम और सीता माता के विवाह का संयोग"

विवाह पंचमी को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की इस दिन भगवान श्रीराम और सीता माता का विवाह हुआ था। इस दिन को....

"कैसे बने हनुमान बलशाली"

शिवमहापुराण के अनुसार देवताओं और दानवों को अमृत बांटते हुए विष्णुजी के मोहिनी रूप को देखकर लीलावश शिवजी ने कामातुर होकर अपना वीर्यपात कर दिया। सप्त....

"क्यों किया था विभीषण ने गणेश जी पर वार"

कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने अपने भक्त और रावण के भाई विभीषण को भगवान विष्णु के ही एक रूप रंगनाथ की मूर्ति प्रदान की थी। विभी....

"क्यों कहा श्रीकृष्ण ने की अपनी मुसीबतों का सामना करो"

महाभारत काल की बात है। एक बार कृष्ण और बलराम किसी जंगल से गुजर रहे थे। चलते-चलते काफी समय बीत गया और अब सूरज भी लगभग डूबने वाला था। अंधेरे में आगे ....

"माता सीता ने क्यों निगला लक्ष्मण को"

एक समय की बात है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम रावण का वध करके भगवती सीता के साथ अवधपुरी वापस आ गए । अयोध्या को एक दुल्हन की तरह से सजाया गया और उत्स....

श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए महादेव क्यों बने साधु

लीला पुरुष श्रीकृष्ण जब भी कोई लीला रचते हैं, उसके पीछे कोई आदर्श विद्यमान रहता है। भगवान शिव के इष्ट हैं विष्णु इसलिए जब-जब नारायण ने अवतार लिया त....

रावण की लंका की चमक को किसने किया फीका

रामायण में वर्णित लंका कांड के अनुसार हनुमान जी ने रावण की सोने की लंका में आग लगाई थी लेकिन रावण की सोने की लंका को काला किसने किया था। जब रावण ने....

हनुमान जी से जानिए सफलता के सूत्र

हनुमान जी की पूजा से ही नहीं बल्कि उनसे कुछ बातें सीख लेने पर भी हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं और सभी कामों में सफलता मिल सकती है। यहां जानि....

कर्तव्यपरायणता का अद्भुत आदर्श

प्राचीन काल में सर्वसमृद्धिपूर्ण वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक धर्मात्मा राजा था । एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक गुणी व्यक्ति अपनी ....

श्रीराम का पत्नी प्रेम

वनगमन के समय सेवा में चलने के लिए श्रीसीता जी का जब आग्रह देखा गया, तब उनकी शारीरिक सुकुमारता आदि के स्नेह से जैसी प्रेमपूर्ण शिक्षादी गयी, वह....

स्वामी विवेकानंद जयंती -
स्वामी विवेकानंद आधुनिक युग के प्रथम पंक्ति के विश्व प्रसिद्ध महापुरुष थे । वे भारतीयता के आदर्श प्रतिनिधि होने के अतिरिक्त, वैदिक धर्म तथा संस्कृति क....
रामकृष्ण परमहंस चरित्र

रामकृष्ण अपने को अपने युवा शिष्यों के बराबर मानते थे । वह उनके बंधु सखा थे, उनके साथ सहज आत्मीयता से बात करते थे, किसी गुरुता के साथ नहीं । मा....

गरुड, सुदर्शनचक्र और श्रीकृष्ण की रानियों का गर्व-भंग
एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने गरुड को यक्षराज कुबेर के सरोवर से सौगंधिक कमल लाने का आदेश दिया। गरुड को यह अहंकार तो था ही कि मेरे समान बलवा....
भक्त हनुमान

हनुमान जी महाराज भगवान के परम भक्त थे । उनमें तीन बात विशेष थी -

1. भगवान के चरणों में रहते थे । भगवान को छोड़कर एक क्षण भी अलग न....

परमभक्त हनुमान्
हनुमान् जी महाराज भगवान् के परम भक्त थे। उनमें तीन बात विशेष थी-
१- भगवान् के चरणों में रहते थे। भगवान् को छोड़कर एक क्षण भी अलग नहीं होना चाहते थे....
श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह
राजा दशरथ ने जिस दिन अपने पुत्रों के विवाह के निमित्त उत्तम गोदान किया, उसी दिन भरत के सगे मामा केकयराजकुमार वीर युधाजित् वहां आ पहुंचे। उन्होंने महार....
विश्वामित्र द्वारा श्रीराम को दिव्यास्त्र-दान ||
ताटका वन में रात बिता कर महायशस्वी विशवामित्र हंसते हुए मीठे स्वर में श्रीरामचन्द्र जी से बोले-

‘महायशस्वी राजकुमार! तुम्हारा कल्याण हो। ताटका ....
श्री हनुमान क्यों हुए सिंदूरी

कहा जाता है जब रावण को मारकर राम जी सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ आने की जिद की। राम जी ने उन....

‎गिलहरी‬ का ‪‎रामसेतु‬ बनाने में योगदान
माता सीता को वापस लाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा भैया आप इतन....
कैसे वृंदा ने लिया तुलसी का रूप

पौराणिक कथा के अनुसार एक बड़ी ही सुशील कन्या थी। नाम था वृंदा। उसका जन्म राक्षस कुल में हुआ था लेकिन वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु जी की परम भक....

गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या की कहानी
रामायण में वर्णित कथा के अनुसार राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक नि....
भक्ति की अद्भुत पराकाष्ठा की मिसाल भगवान हनुमान
लंका मे रावण को परास्त करने के बाद श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ अयोध्या लौट चुके थे। प्रभु राम के आने की खुशी में पूरे अयोध्या मे....
माता सीता के स्वयंवर की कथा
माता सीता के स्वयंवर की कथा वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस के बालकांड सहित सभी रामकथाओं में मिलती है। वाल्मीकि रामायण में जनक द्वारा सीता के लिए वीर्....
श्रीराम जी और श्रीकृष्ण जी
श्रीसूत जी ने श्रीमद्भागवत में कहा है - ‘एते चांशकला: पुंस: कृष्णस्तु भगवान्स्वयम्’ इस वचन से यह स्पष्ट होता है कि भगवान ने यदि अपने किसी अवतार....
माखन लेने की अनोखी रीति
एक दिन माता यशोदा दही मथकर माखन निकाल रहीं थीं। अचानक मां को आनन्द देने के लिए बलराम और श्याम उनके निकट पहुंच गए। कन्हैया ने मां की चोटी पकड़ ली ....
एक ऐसा तीर्थ जहां स्वयं प्रभु राम ने की थी शिव जी की आराधना
रामेश्वर
ज्योतिर्लिंग में एकादशवें पर है श्री "रामेश्वर"। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थ....
"दशराज्ञ युद्ध" का रहस्य
गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र के मध्य प्रतिष्ठा की लड़ाई चलती रहती थी। इस लड़ाई के चलते ही 5 हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के पूर्व एक और महासंग....
सबसे बड़ा संयम है मौन

मौन रहने व कम बोलने से ना केवल हमारी वाणी का संयम होता है, अपितु इससे हमारी जीवनी शक्ति का भी ....

कन्हैया द्वारा शालग्राम की चोरी
गोकुल में चारो तरफ आनंद छाया रहता था। वहां के निवासी श्री कृष्ण की लीला देखते नहीं अघाते थे और श्रीकृष्ण नित्य नूतन लीला से सबके आनंद में सरोबार करते ....
केवट के भाग्य
श्रीराम के बार-बार मना करने पर भी अयोध्यावासी वापस नहीं लौट रहे थे। श्रीराम भी उनके दु:ख से दु: खी थे। पूरी रात अभी बाकी थी। तभी श्रीराम ने सुमन्त्र क....
चित्रकूट की अद्भुत शोभा
वन में भ्रमण करते हुए श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुंचे। महर्षि ने तीनों अतिथियों का स्वागत किया और वन के ....
समुद्रोल्लंघन की तैयारी
राक्षसों के राजा रावण की राजधानी चारों ओर समुद्र से घिरी हुई थी। वहाँ का दुर्ग (किला) भी बहुत विशाल और सुदृढ़ था। उसके चारो ओर बलवान राक्षसों का पहरा ....
श्रीरामचरितमानस (लंकाकाण्ड)
विभीषण द्वारा श्रीराम जी के साथ अयोध्या चलने का आग्रह

सकुल सदल प्रभु राम मारयो। पा....
देवउठनी एकादशी आज
हिंदू मान्यता के अनुसार दिवाली के बाद आने वाली एकादशी पर देव उठ जाते हैं। इसे देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस बार 10 और 11 नवंबर दो दिन एकादशी है। इस....
रामचरितमानस
रामचरितमानस में श्री राम ने जीवन में सफल होने के कई बाते बताई है। इसी में उन्होंने बताया कि हमे किस तरह के इंसान से किस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। ....
मंथरा की कुशिक्षा
बारात के अयोध्या लौटने का समाचार सुनकर अयोध्या वासियों ने अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया। जगह- जगह स्वागत- मंडप बनाए गए। पूरे नगर को ध्वज, तोरण और बंद....
श्रीराम भक्त
भगवान श्रीरामचंद्र जी ऐसे शरणागतवत्सल हैं कि जो जीव एक बार भी सच्चे हृदय से उनके शरणागत हो गया, उसके वचन और कर्तव्य की चूक पर फिर कभी दृष्टि न देकर वे....
श्रीराम मर्यादा चरित्र
पिता - भक्ति श्रीरघुनाथ जी नित्य प्राय: काल उठकर श्रीपिता जी को नमस्कार करते थे और अपने संपूर्ण कार्य उनकी आज्ञा के अनुसार करके अपनी सेवा से उन्हे....
एक पत्नीव्रत धर्म
श्रीरघुनाथ जी ने अकनारीव्रत को चरितार्थ करके महान आदर्श उपस्थित कर दिया । यद्यपि आपको स्मृतिकारों के प्रमाणनुसार चार विवाहों की प्रचलित प्रथा की मर्य....
श्रीभरत जी के विशेषतर धर्म से शिक्षा
भगवत धर्म अर्थात् भगवत सेवा (श्रीराम भक्ति) ही श्रीभरत जी की भी इष्ट - चर्या थी । यथा - साधन सिद्धि राम पग नेहू । मोहि लखि परत भरत मत एहू ।। परंत....
श्रीभरत जी के विशेषतर धर्म से शिक्षा
भगवत धर्म अर्थात् भगवत सेवा (श्रीराम भक्ति) ही श्रीभरत जी की भी इष्ट - चर्या थी । यथा - साधन सिद्धि राम पग नेहू । मोहि लखि परत भरत मत एहू ।। परंत....
सीता शुकी संवाद
एक दिन परम सुंदरी सीता जी सखियों के साथ उद्यान में खेल रही थीं । वहां उन्हें शुक पक्षी का एक जोड़ा दिखायी दिया जो बड़ा मनोरम था । वे दोनों पक्षी एक ड....
श्रीकैकेयी और सुमित्रा माता के चरित्र से शिक्षा
भरत माता श्री कैकेयी जी के चरित्रों से प्रकट और गुप्त - दो प्रकार की शिक्षाएं लौकिक तथा पारलौकिक रूपों में मिलती हैं । प्रथम प्रकटरूप में लोकशिक्षा को....
शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार
एक समय की बात है, भगवान शिव ने भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दे दिया कि तुम जिसके सिर पर अपना हाथ रख दोगे, वह जल कर भस्म हो जायेगा । भस....
भक्तवत्सलता

जिस भक्त पर भगवान श्रीराम की ममता (अपनापन) और प्यार हो गया, फिर उस पर करुणा के सिवा उन्हें कभी क्रोध आता ही नहीं । वे अपने भक्त के दोष को आंखो....

श्रीलक्ष्मण जी के विशेष धर्म से शिक्षा

वनगमन के समय श्रीराम जी ने बड़े प्रेम के साथ लक्ष्मण जी से कहा कि वे अयोध्या में रहकर माता पिता और प्रजा की सेवा करें । भगवान के वचन को सुनकर ....

श्री शबरी जी की भक्ति

सबको परमगति प्रदान करते हुए उदारशिरोमणि भगवान शबरी को भी गति देने के लिए उसके आश्रम में पधारे । ‘आश्रम’ शब्द से शबरी जी का विरक्त होना सूचित क....

सुदर्शन पर जगदंबा की कृपा

अयोध्या में भगवान राम से कुछ पीढ़ियों बाद ध्रुवसंधि नामक राजा हुए । उनकी दो स्त्रियां थीं । पट्टमहिषी थी कलिंगराज वीरसेन की पुत्री मनोरमा और छ....

शिव और सती

सिव सम को रघुपति ब्रतधारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ।।
भगवान शिव और माता सती देवी की असीम महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से प्रतिपादित की है । भ....

भगवान हनुमान के चरित्र से शिक्षा

सचिव कैसा होना चाहिए और उसे सचिव धर्म का पालन किस प्रकार करना चाहिए, इसका उत्तम उदाहरण श्रीहनुमान जी ने दिखाया है । महाबली वाली के दुरत्यय आघा....

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