हमारी संस्कृति
अर्धनारीश्वर शिव

सृष्टि के आदि में जब सृष्टिकर्ता ब्रह्माद्वारा रची हुई सृष्टि विस्तार को नहीं प्राप्त हुई, तब ब्रह्मा जी उस दु:ख से अत्यंत दु:खी हुए । उसी समय....

यज्ञ कर्म
एवं बहुविधा यज्ञा विवतो ब्रह्मणो मुखे।
कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ।। 4/31


अर्थात:....
अर्जुन के रथ पर क्यों बैठे थे हनुमान?
महाभारत के अनुसार, जब कौरव सेना का नाश हो गया तो दुर्योधन भाग कर एक तालाब में छिप गया। पांडवों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने दुर्योधन को युद्ध क....
श्रीकृष्ण को श्राप से बचाने के लिए सुदामा ने स्वीकारी थी उम्रभर की दरिद्रता
एक ब्राह्मणी थी जो बहुत गरीब निर्धन थी. भिक्षा माँग कर जीवन यापन करती थी. एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिक्षा नहीं मिली वह प्रति दिन पानी पीकर भग....
दूसरों के हिस्से का भोजन न खाएं
महाभारत के महानायक भीम को भोजन बेहद पसंद था। महाभारत की यह कहानी कौरव और पांडव के बचपन की है। तब सभी साथ रहते थे। लेकिन जब भोजन होता तो भीम, सबसे ज्या....
"मां दुर्गा ने कैसे तोड़ा देवताओं का घमंड?"
देवताओं और राक्षसों के बीच एक बार अत्यंत भीषण युद्ध हुआ। रक्त से सराबोर इस लड़ाई में अंततः देवगण विजयी हुए। जीत के मद में देवगण अभिमान और घमंड से भर गए....
"महादेव के अर्द्धनारीश्वर अवतार की कथा"

“शीश गंग अर्धंग पार्वती….. नंदी भृंगी नृत्य करत है”  शिव स्तुति में आये इस भृंगी नाम को आप सब ने जरुर ही सुना होगा। पौराणिक....

धनतेरस: जानिए क्या है शुभ मुहूर्त ?

धनतेरस 2017 में कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन धन्वन्तरी देवता, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा ....

"गुरुनानक जी की सीख - ईमानदारी से जीना चाहिए"

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु थे। जब गुरु नानक देव जी को ज्ञान की प्राप्ति हुई तब वे चार उदासियों पर निकले और एक बार ....

"जानिए कैसे करें संकष्टी गणेश चतुर्थी की पूजा"

संकष्टी चतुर्थी माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को कहा जाता है। वर्ष 2018 में 5 जनवरी को संकष्टी चतुर्

क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित है कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया इसलिए दी....

राजा राज्यवर्धन पर भगवान सूर्य की कृपा

पूर्वकाल में दम नामक एक राजा थे, उनके पुत्र का नाम राज्यवर्धन था । वे भलीभांति पृथ्वी का पालन करते थे । उनके राष्ट्र में धन - जन प्रतिदिन बढ़ ....

साधना में मनोयोग की महत्ता

वैताल ने कहा - राजन ! उज्जयिनी में महासेन नाम का एक राजा था । उसके राज्य में देवशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था । देवशर्मा का गुणाकर नामक एक ....

मुक्ति के लिये साधन की आवश्यकता

भगवान सर्वज्ञ हैं, सब कुछ जानते हैं, परंतु किसकी मुक्ति होगी इसको भगवान भी पहले से नहीं जानते हैं, यदि पहले से ही जान जाएं तो प्रयत्न की क्या ....

व्यर्थ है मोह का बंधन
इतना मिल गया, इतना और मिल जाए फिर ऐसा मिलता ही रहें - ऐसे धन, जमीन, मकान, आदर, प्रशंसा, पद, अधिकार आदि की तरह बढ़ती हुई वृत्ति का नाम ‘लोभ’ है । जहां ....
चाणक्य की सीख‬
‎बात 325 ई. पू. की है, जब भारत में मौर्य वंश का शासन था। सम्राट चंद्रगुप्त एक कुशल योद्धा, सेनानायक तथा महान विजेता ही नहीं थे, बल्कि एक योग्य शासक भी....
शिक्षाप्रद कहानियां- आत्म संतोष का गुण‬
‎एक गांव में एक गरीब आदमी रहता था। वह बहुत मेहनत करता, किंतु फिर भी वह धन न कमा पाता। इस प्रकार उसके दिन बड़ी मुश्किल से बीत रहे थे। कई बार तो ऐसा हो ज....
भगवान बुद्ध का ‪उपदेश‬
एक बार मगध के व्यापारी को व्यापार में बहुत लाभ हुआ, अपार धन-संपत्ति पाकर उसका मन अहंकार से भर गया। उसके बाद से वह अपने अधीनस्थों से अहंकारपूर्ण व्....
शिक्षाप्रद कहानियां - धन का मोह
एक नदी के किनारे एक महात्मा रहते थे। उनके पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला- महाराज!....
जानिए क्यों की जाती है मंदिर की परिक्रमा तथा क्या है इसका महत्त्व ?
ईश्वर की आराधना करने के तरीके अनेक हैं, इसमें पूरे विधि-विधान से पूजा करने से लेकर उपवास रख कर भी ईश्वर को प्रसन्न करने जैसी रीति है। लेकिन इसके ....
मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप- मां चंद्रघंटा
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
<....
कात्यायनी : मां दुर्गा का छठवां स्वरूप
नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी....
स्वार्थरहित होकर किया गया दान ही श्रेष्ठ
महाभारत में एक कथा है, जो सच्ची दानवीरता की मिसाल है। एक बार की बात है कुरु युवराज दुर्योधन के महल के द्वार पर एक भिक्षुक आया और दुर्योधन से बोला- राज....
क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार
भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित है कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया इसलिए दीपाव....
जन्म और मृत्यु क्यों ?
सृष्टि में तीन प्रश्न महत्त्वपूर्ण हैं - हम क्यों जन्म लेते हैं ? हम कैसे जन्म लेते हैं ? मृत्यु के पश्चत हम कहा जाते हैं और कैसे रहते हैं ? वेदांत मे....
श्रीयंत्र है मां लक्ष्मी को परम प्रिय
मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है श्रीयंत्र। कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। घर में विधि-विधान के साथ ....
गीता के उपदेष्टा श्रीकृष्ण
परब्रह्म पुरुषोत्तम भगवान अपनी माया का अपनी योगमाया का अधिष्ठान करके मनुष्य रूप से सृष्टि में प्रकट होते हैं और संसार - चक्र की स्थानविच्युता धुरी को....
मन ही बंधन और मुक्ति का कारण

सुशील नाम के एक ब्राह्मण थे । उनके दो पुत्र थे । बड़े का नाम था सुवृत्त और छोटे का वृत्त । दोनों युवा थे । दोनों गुणसंपन्न तथा कई विद्याओं में....

आज का भजन
आज का पंचांग
आज का दर्शन
© 2017 Sanskar Info Pvt. Ltd.
All rights reserved | Legal Policy
कार्यक्रम विवरण | हमारे बारे में | संपर्क