संत गुरु
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|दादा वासवानी

दादा वासवानी पूरे विश्व में एक मानवीय, दार्शनिक, शिक्षक, लेखक, प्रभावशाली वक्ता, अहिंसा के मसीहा और गैर सांप्रदायिक नेता के रूप में विख्यात हैं। उनका जन्म हैदराबाद सिंध (अब पाकिस्तान में) 2 अगस्त 1918 को एक सिंधी परिवार के आध्यात्मिक नेता और साधु वासवानी मिशन के मुखिया जशन पहलराज वासवानी के परिवार में हुआ था। मेधावी छात्र होने के नाते उन्हें दोहरा प्रमोशन दिया गया। मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने विज्ञान विषय के साथ स्नातक पास किया था। कक्षा में प्रथम श्रेणी में पास होने के बाद उन्हें डीजे सिंध कॉलेज में फैलोशिप से सम्मानित किया गया।
उनके द्वारा एमएससी में लिखे गये थिसिस द स्कैट्रिंग ऑफ एक्स-रे को नोबल पुरस्कार विजेता डॉ सीवी रमन ने जांचा था, और दादा वासवानी के विचारों की मौलिकता से बहुत प्रभावित हुए थे। दादा वासवानी द्वारा संचालित साधु वासवानी मिशन के तहत वासवानी सेंटर कोलोन एवं पनामा के साथ-साथ पूरी दुनिया में शैक्षिक, गरीब और जरूरतमंद परिवार के लोगों को खाने-पीने किराने की वस्तुओं का वितरण किया जाता है। इसके अलावा निःशुल्क गरीबों और असहाय लोगों के लिए मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए समय-समय पर चिकित्सा शिविरों का आयोजित की जाती है। अप्रैल 1998 में उन्हें ‘यू थांट’ नामक शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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